Hindi horror reading story

 


पड़ोस में रहने वाला दीपक बहुत घबराया हुआ था, मैंने उससे पूछ लिया क्या बात है दीपक बहुत घबराये हुए हो? दीपक ने बताय की उसके पिता दीपांकर आज सवेरे गाँव गए थे, शाम होने को आयी और अभी तक उन्होंने न यही कॉल किया और ना ही उनका मोबाइल लग रहा है, जबकि शाम तक तो उन्हें पहुँच जाना चाहिए था . इस पर मैंने कहा की इसमें घबराने वाली कौन सी बात है, हो सकता है उनके मोबाइल का टावर काम नहीं करता होगा, वो छोटे बच्चे थोड़े ही हैं,जो गुम हो जाएंगे, इस पर दीपक ने बताया की इसी बात का तो डर है, वो मेरे पिता है और मैं उन्हें अच्छी तरह से जानता हूँ, घर में एक चूहा से डरने वाले पिता इतने डरपोक हैं की एक बार घर में तेलचट्टा को देख लिया तो अपने बेड से नहीं उतरे, उन्हें बहुत ज्यादा डर लगता है, वो बहुत बड़े डरपोक हैं, यह सुन कर मुझे हस्सी आ रही थी, क्योँकि वाकई इतने बड़े डरपोक इंसान को मैंने कभी नहीं देखा. और अब तो मुझे भी टेंशन होने लगी, मैंने दीपक से कहा, गाँव में किसी को फोन लगा कर पूछो की वह घर पहुंचे की नहीं, दीपक को आईडिया पसंद आया और उसने गाँव में अपने चाचा को फोन लगा कर पूछा, चाचा ने बताया की दीपांकर जी अभी तक नहीं पहुंचे हैं, अब तो सभी घबरा गए आखिर दीपांकर जी गाँव बोल कर निकले थे और कहाँ चले गए.फिर बस स्टैंड जा कर बस के बारे में पता लगाया गया और उसके ड्राइवर से बात की गयी तो पता चला की दीपांकर जी अपने गाँव ना उतर कर सबसे अंतिम स्टॉप पर उतरे हैं वजह था वो बस में सो गए और जब पूरी बस खाली हुई तो उन्हें जगाया गया, अब तो और परेशानी वाली बात, उनसे पूछा गया की अभी कहाँ हैं तो पता चला की ड्राइवर तो अपने घर पर है । 

मैंने एक गाडी ठीक की और मैं और दीपक दोनों गाडी से निकल गए, पहले बस स्टॉप गए और वहां पता किया जब पता चला की वो वहां से निकल चुके हैं तो वापस गांड वाले रास्ते में निकल पड़े, अब रात हो चुकी थी, अब तो कुछ दिख भी नहीं रहा था, हलाकि एक तरफ टॉर्च से दीपक और दूसरी तरफ टॉर्च जला कर मैं दीपांकर जी को ढूंढ रहे थे, लेकिन वो कहीं नजर नहीं आ रहे थे, तभी कुछ दुरी पर मैंने एक पेड़ पर कपड़ा देखा, मैंने गाडी को रोका और पेड़ की तरफ चल पड़ा, पेड़ पर देखा तो हैरान रह गया, दिपांकर जी पेड़ पर चढ़े हुए थे, मैंने उन्हें पेड़ से उतरने को कहा, वो पेड़ से उतरे मैंने पेड़ पर चढ़ने का वजह पूछा तो उन्होंने बताया की यहाँ उन्हें एक भूत मिला जो उनका बैग छीन रहा था, मैंने जब नहीं दिया तो उसने मुझे मारा, मेरी समझ में नहीं आ रहा था की भला भूत क्यों बैग छिनेगा…मैंने दीपांकर जी से पूछा भूत देखने में कैसा था, इस पर दीपांकर जी ने बताया की भूत भूत की तरह था, अब तो मुझे गुस्सा आ रहा था की भला ऐसा क्या था, उस भूत में जिसे देख कर वो इतना डर गए की पेड़ पर चढ़ गये, और भला भूत उनका बैग क्यों छीन रहा था, यह सब सोच ही रहा था की अचानक से गाडी की हेड लाइट बंद हो गयी, और मुझे भी कुछ उड़ता हुआ दिखाई दिया, दीपांकर जी ने बोला की यही भूत है, जिसकी वजह से मैं पेड़ पर चढ़ गया. वाकई हवा में कुछ हिल रहा था, और मैंने दीपांकर ही से बैग ले लिया, तभी मुझे एहसास हुआ की कोई बैग मेरे हाथ से खींच रहा है, मैंने पूछा कौन है तो कोई आवाज नहीं आया, तभी गाडी का हेड लाइट जला और सब कुछ पहले जैसा ही शांत हो गया. वाकई मुझे भी ताजुब हो रहा था की यहाँ कोई भूत था, हम लोग तेजी से उस जगह से बाहर निकल गए……….

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